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// मॉर्स कोड - डॉट्स और डैश के साथ क्लासिक टेलीग्राफ एनकोडिंग

[क्लासिक]

टेलीग्राफ युग

एक ऐतिहासिक संचार तरीका, जिसका दुनिया भर में एक से अधिक शताब्दी तक उपयोग हुआ।

[ऑडियो]

साउंड प्लेबैक

वास्तविक टाइमिंग के साथ बीप की आवाज़ों के रूप में मॉर्स कोड चलाएँ।

[यूनिवर्सल]

अंतरराष्ट्रीय

अक्षरों, अंकों और सामान्य विराम चिह्नों के लिए समर्थन।

>> तकनीकी जानकारी

मॉर्स कोड कैसे काम करता है:

मॉर्स कोड टेक्स्ट अक्षरों को डॉट्स (छोटे सिग्नल) और डैश (लंबे सिग्नल) की श्रृंखला के रूप में दर्शाता है। हर अक्षर का एक अनोखा पैटर्न होता है। अक्षरों को अलग करने के लिए स्पेस और शब्दों को अलग करने के लिए स्लैश (/) का उपयोग होता है।

उदाहरण:

SOS → ... --- ... HELLO → .... . .-.. .-.. --- A → .- B → -...

मॉर्स कोड क्यों उपयोग करें:

  • >आपातकालीन सिग्नलिंग
  • >एमेच्योर रेडियो
  • >ऐतिहासिक शिक्षा
  • >क्रिप्टोग्राफी पहेलियाँ
  • >एक्सेसिबिलिटी टूल्स

>> अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मॉर्स कोड क्या है?

मॉर्स कोड डॉट्स (छोटे सिग्नल) और डैश (लंबे सिग्नल) का उपयोग करके टेक्स्ट अक्षरों को एन्कोड करने की विधि है। इसे 1830 के दशक में टेलीग्राफ सिस्टम के लिए विकसित किया गया था और आज भी आपातकालीन स्थितियों और एमेच्योर रेडियो में उपयोग होता है।

मॉर्स कोड में SOS का क्या मतलब है?

मॉर्स कोड में SOS इस प्रकार है: ... --- ... (तीन डॉट्स, तीन डैश, तीन डॉट्स)। यह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त डिस्टेस सिग्नल है, जिसे इसके स्पष्ट और आसानी से पहचानने योग्य पैटर्न की वजह से चुना गया।

मॉर्स कोड कितनी तेज़ी से भेजा जाता है?

मॉर्स कोड की गति शब्द प्रति मिनट (WPM) में मापी जाती है। शुरुआती आमतौर पर 5–10 WPM से शुरू करते हैं, जबकि अनुभवी ऑपरेटर 40+ WPM तक पहुँच सकते हैं। टाइमिंग डॉट:डैश:शब्द-अंतर के लिए 1:3:7 अनुपात का पालन करती है।

क्या आज भी मॉर्स कोड का उपयोग होता है?

हाँ! मॉर्स कोड अभी भी उड्डयन, एमेच्योर रेडियो, सैन्य प्रशिक्षण और विकलांग व्यक्तियों के लिए सहायक तकनीक में उपयोग होता है। यह एस्केप रूम और पज़ल गेम्स में भी लोकप्रिय है।

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